18 अप्रैल 2014 की रचना। जब बनारस से केजरीवाल व नरेंद्र मोदी लोकसभा के प्रत्याशी थे।
हे भाजपाइयों
केजरीवाल का क्यों
विरोध कर रहे हो।
फूलों की पंखुडिय़ों के बदले
टमाटर फेंक रहे हो।
इस तरह तो तुम
बाबा विश्वनाथ की नगरी
को बदनाम कर रहे हो।
पहले गांधी का और अब
गांधीगीरी का विरोध कर रहे हो।
क्या मान लूं कि नाथूराम गोडसे
की राह पर चल रहे हो।
कांग्रेस और सपा प्रत्याशियों का
विरोध क्यों नहीं करते
शायद तुम्हें मालूम है वहां
फूल नहीं कुछ और मिलेगा।
मेरे लाल एेसा क्यों किया
पूर्वजों को भी खलेगा।
मार इतनी पड़ेगी कि पिचके टमाटर
और फूटे अंडों सा तुम
सड़क पर बिखर जाओगे
फिर तो नमो-नमो नहीं
बाप-बाप चिल्लाओगे
मैं तो कहता हूं यह
लहर नहीं जहर है।
नीलकंठ को समर्पित कर दो।
दो शब्द प्रेम का
काशी में भी रहने दो।
-अजय पांडेय
सुहवल, गाजीपुर
हे भाजपाइयों
हे भाजपाइयों
केजरीवाल का क्यों
विरोध कर रहे हो।
फूलों की पंखुडिय़ों के बदले
टमाटर फेंक रहे हो।
इस तरह तो तुम
बाबा विश्वनाथ की नगरी
को बदनाम कर रहे हो।
पहले गांधी का और अब
गांधीगीरी का विरोध कर रहे हो।
क्या मान लूं कि नाथूराम गोडसे
की राह पर चल रहे हो।
कांग्रेस और सपा प्रत्याशियों का
विरोध क्यों नहीं करते
शायद तुम्हें मालूम है वहां
फूल नहीं कुछ और मिलेगा।
मेरे लाल एेसा क्यों किया
पूर्वजों को भी खलेगा।
मार इतनी पड़ेगी कि पिचके टमाटर
और फूटे अंडों सा तुम
सड़क पर बिखर जाओगे
फिर तो नमो-नमो नहीं
बाप-बाप चिल्लाओगे
मैं तो कहता हूं यह
लहर नहीं जहर है।
नीलकंठ को समर्पित कर दो।
दो शब्द प्रेम का
काशी में भी रहने दो।
-अजय पांडेय
सुहवल, गाजीपुर
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