Sunday, 12 June 2016

हे ! नारी तुम महान हो

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बचपन में पढ़ाई के समय " इलाहाबाद के पथ पर तोड़ती पत्थर ....." कविता पढ़ा था। तभी मेरे जेहन में एक ही सवाल बार-बार कौंध रहा था। हे नारी तुम कितनी महान हो। अपने बेटे को पालने के लिए भरी दोपहरी में दो रोटी की जुगाड़ में इलाहाबाद के पथ पर पत्थर तोड़ रही थी। अब आज डाक्टर ओपी के इस चित्र को देख यह लगा कि इतने दिनों बाद भी नारी वहीँ है जहाँ पहले थी। बारिश और कीचड़ के बीच सिर पर टोकरी का बोझ .... यह रोटी का ही तो जुगाड़ है।
आज मैं लखनऊ में था। एक सज्जन मिले किसी बात पार उन्होंने एक ज्ञान की बातें कह डाली। अब आप भी सुन लीजिये। उन्होंने कहा, जब औरतों का नाक न हो तो वे मैला भी खा जायेंगी। वहां दो-तीन महिलायें भी थीं। खैर यह उनकी महानता थी कि इस बात का ज़रा सा विरोध नहीं किया। कहा भी गया है, नारी का दूसरा नाम सहनशीलता है। मुझसे रहा नहीं गया। लगा यह तो नारी दिवस पर नारी का अपमान है। मैंने अपना तर्क रखा। हाँ नारी पर कही गयी उक्त विद्वान की बात तो सही है, पर पुरुष तो नाक रहते हुए मैला खा लेता है। नारी नाक का सही उपयोग तो कर रही है। इस बात की गारंटी तो है की जब तक नाक सही सलामत है मैला नहीं खाएगी। पुरुष की क्या गारंटी?? क्या आपको नहीं लगता कि जिस नारी को शक्ति का रूप कहा गया है। जिस नारी को दुर्गा का रूप कहा गया है ... उसे हम मैला खाने की बात कह रहे हैं।। उसका हम अनादर कर रहे हैं। उसका अपमान कर रहे हैं। जिस नारी ने इलाहाबाद के पथ पर भरी दोपहरी में पत्थर तोड़कर .... पसीने से सना आंटे की रोटी खिलाकर तुम जैसा मर्द तैयार किया। तुम जैसा पौरुष तैयार किया .... और तुम... और तुम्हारी सोच ... और तुम्हारा नजरिया यह?? सौ साल पहले भी एक नारी एक अबोध बच्चे को मर्द बनाने के लिए मजदूरी करती थी। आज भी कर रही है। अबोध बालक से मर्द बन जाने के बाद सौ साल पहले नारी के बारे में पुरुष " नारी और मैला" का उदाहरण देता था। आज अब भी दे रहा है ... और इसकी क्या गारंटी कि आने वाले सौ साल बाद नहीं देगा?
हे पुरुष वर्ग अगर एक नारी के प्रति तुम्हारी यही नजरिया है। तो तुम नारी को दुर्गा कहना छोड़ दो। एक नारी को आदि शक्ति कहना छोड़ दो। एक नारी को माँ कहना छोड़ दो।
नहीं छोड़ सकते न। मैं जानता हूँ कि पुरुष वर्ग में दोहरा चरित्र होता है। एक तरफ नारी का दूध पीकर पौरुष बनते हो। नारी शक्ति का पूजा कर खुद का कल्याण चाहते हो... पर जब उसी नारी को " नाक और बिष्टा" जैसा शब्द कहकर अपमान करते हो। यही कारण है कि आज भी नारी शक्ति के बाद भी अबला है... और तुम सबला। आज भी अबला के आंचल में दूध और आँखों में पानी है। आंचल का दूध तो तुम पी जाते हो पर आंसू नारी के हिस्से छोड़ जाते हो। अब तुम ही बताओ महान किसे कहें। नारी को या तुम्हे.... हे! नारी तुम महान हो।
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर

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