Sunday, 12 June 2016

घर में रहकर किसे ज्ञान मिला


भूकंप ने महल वालों को भी भागना सीखा दिया, 
कुछ पल के लिए सही, आसमान के नीचे 
रहना सीखा दिया। 
मैदान में धूप के बीच युवक और युवतियां 
खडे हो माथे से पसीना पोछ रहे थे। 
न एसी, न पंखा और न ही कूलर
अगर कुछ था तो सूरज की तपिश
और साथ में भूकंप का डर
एक ने बोला, भूकंप ने भेदभाव मिटा दिया
जीवन का अर्थ समझा दिया
यहां न कोई छोटा न बडा
ईश्‍वर जब कहर बरबाता है तो
सभी उसके आगोश में होते हैं
अब उसे कौन समझाए
ज्ञान के लिए बाहर भागना पडता है
महल में रहकर अब तक किसे ज्ञान मिला
भाग-भाग कर ही तो सभी को ज्ञान मिला
चाहे वह गांधी हाें या गौतम बुद़ध।


अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर

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