Sunday, 12 June 2016

ये नेता हैं 

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ये नेता हैं वोट के लिए
विष बो रहे हैं 
अब तो सेना को भी
बांटने की बात कर रहे हैं
किसका कितना योगदान है देश के लिए
हमें क्यों समझाते हो .
तुम अपना योगदान बता दो
जनता को क्यों मूर्ख बनाते हो
पहले दिलों को बांटते थे
अब देश को भी बाटने की
बात कर रहे हैं
तभी तो अपनी जुबा से बस
ज़हर उगल रहे हैं
ये जनता है समझती है
जो भाषा तुम बोल रहे हो
हमें क्या आज़म खां की
भैस समझ रहे हो
अपनी जनसभाओं में
जनता को भड़काने की
बात कर रहे हैं
इस तरह वो हमारी भावनाओं
से खेल रहे हैं
चुनाव आयोग की कार्यवाही पर
हाथ मल रहे हैं
बूथों पर वोटो की चोरी
कैसे की जाएगी
कार्यकर्ताओं को समझा रहे हैं
फिर भी खुद को शाह कह रहे हैं 

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