खूंटी पर टंगे कुछ प्रश्न
आता-जाता देखता-सुनता
पर मैं मौन।
कुछ उत्तर नहीं सुझता
एक दिन घबड़ाकर
उसे घुंटी से उतारकर
अपने शिक्षक के घर की
घुंटी पर टांग आया।
यह सोचकर कि
इसे यहां उत्तर मिल जाएगा।
मैं बंद दरवाजा के भीतर
घर मे सो गया आराम से।
अब यहां कोई प्रश्न नहीं होगा।
अचानक किवाड़ पर दस्तक हुआ।
दरवाजा खोला तो सामने
पोटलियों से भरा प्रश्न खड़ा था।
कहा, मुझसे दूर मत भाग
मेरे प्रश्नों का उत्तर ढूंढ
मैं ही शिक्षक हूं
अब घर की घुंटीयों पर
टांग दिया गया हूँ।
सिर्फ शिक्षक दिवस के दिन
लोग आते हैं मुझे बधाइयां देने
मेरे प्रश्नों का हल कोई
ढूंढे तो जानें।।
आता-जाता देखता-सुनता
पर मैं मौन।
कुछ उत्तर नहीं सुझता
एक दिन घबड़ाकर
उसे घुंटी से उतारकर
अपने शिक्षक के घर की
घुंटी पर टांग आया।
यह सोचकर कि
इसे यहां उत्तर मिल जाएगा।
मैं बंद दरवाजा के भीतर
घर मे सो गया आराम से।
अब यहां कोई प्रश्न नहीं होगा।
अचानक किवाड़ पर दस्तक हुआ।
दरवाजा खोला तो सामने
पोटलियों से भरा प्रश्न खड़ा था।
कहा, मुझसे दूर मत भाग
मेरे प्रश्नों का उत्तर ढूंढ
मैं ही शिक्षक हूं
अब घर की घुंटीयों पर
टांग दिया गया हूँ।
सिर्फ शिक्षक दिवस के दिन
लोग आते हैं मुझे बधाइयां देने
मेरे प्रश्नों का हल कोई
ढूंढे तो जानें।।
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