Monday, 11 September 2017

ये नेता हैं

ये नेता हैं
ये नेता हैं वोट के लिए
विष बो रहे हैं
अब तो सेना को भी
बांटने की बात कर रहे हैं
किसना कितना योगदान है
देश के लिए
हमें क्यों समझाते हो
तुम अपना योगदान बता दो
जनता को क्यों मूर्ख बनाते हो
पहले दिलों को बांटते थे
अब देश को बांटने की बात
कर रहे हैं
तभी तो अपनी जुबां से
बस जहर उगल रहे हैं
यह जनता है सब समझती है
जो भाषा तुम बोल रहे हो
हमें क्या आजम खां की
भैंस समझ रहे हो
अपनी जनसभाओं में
जनता को भड़काने की
बात कर रहे हैं
वे हमारी भावनाओं से
खेल रहे हैं
चुनाव आयोग की कार्रवाई पर
हाथ मल रहे हैं
बूथों पर वोटों की चोरी
कैसे की जाएगी
कार्यकर्ताओं को समझा रहे हैं
फिर भी खुद को शाह कह रहे हैं
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर

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