Monday, 11 September 2017

तो यह हैं शर्तिया इलाज वाले डॉक्टर

तो यह हैं शर्तिया इलाज वाले डॉक्टर
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बात 2002 व 2003 की है। काशी विश्वनाथ ट्रेन से अक्सर दिल्ली जाना होता था। जनरल डब्बे में ही यात्रा करते थे। सोच भी जनरल की तरह। अब भी कोई खास बदलाव नहीं। जैसे ही ट्रेन गाजियाबाद पहुंचती इश्तिहारों की भरमार। दीवारों पर मोटे अक्षरों में लिखे होते थे-
शर्तिया इलाज
अगर आप वर्षों से परेशान हैं डायबिटीज, कैंसर, मिर्गी, अस्थमा, सफेद दाग,लकवा आदि से तो "शर्तिया इलाज" उपलब्ध है।
डॉक्टर शर्तिया सिंह गाजियाबाद वाले
बैठने का दिन
सोमवार,बुधवार व शनिवार
समय
सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक
शाम को 4 बजे से 9 बजे तक
नोट : अन्य दिन फोन से संपर्क कर सकते हैं।
सलाह लेने की कोई फीस नहीं।
अब आप ध्यान दें ये सारे इलाज उन्हीं बीमारियों के लिए तैयार किये जाते हैं तो पूरी तरह ठीक ही नही होते। ऐसे में इस तरह के इश्तिहार देखकर मरीज को एक आशा की किरण दिखता है। इन सभी रोगों का इलाज एक ही डॉक्टर के पास होता है।
2014 में इसी प्रकार का दावा लेकर देश की जनता के पास डॉक्टर फेकू आये। अनुभव 56 इंच का सीना के साथ।
आतंक का खात्मा, पाकिस्तान थर-थर काँपेगा, भारत के एक सैनिक शाहिद होगा तो दुश्मन के 10 सैनिकों को मारेंगे। नक्सलवाद खत्म होगा। विदेशों में जमा काला धन लाएंगे। दाउद को भारत लाएंगे। सबको रोजगार मिलेगा। सबके अच्छे दिन आयेगें। ये सभी रोगों का इलाज सिर्फ 56 इंच सीना वाला डाक्टर कर पायेगा।
देश की जनता शर्तिया इलाज वाले डॉक्टर फेकू सिंह के झांसे में आ गयी। कारण डाक्टर मनमोहन शर्तिया के डाक्टर नही थे। वे सिर्फ डिग्री वाले थे। वैसे भी इस देश मे डिग्री वालों से ज्यादा अनपढ़ और साक्षर वालों के लिए स्कोप है।
बिना अवकाश लिए 24 घंटे गले मे आला लटकाने वाले यह डाक्टर ने 3 साल तक इलाज करते रहे। रोग घटने की बजाय बढ़ता गया। अब आप चाहकर भी डाक्टर बदल नही सकते। पांच साल का ठेका जो है। जब मरीजों की संख्या बढ़ गई तो डॉक्टर फेंकू ने यूपी में भी एक क्लिनिक खोल ली। वहां झाड़फूंक वाले बाबा को बैठा दिया। अगर शर्तिया इलाज से आप ठीक नहीं हुए तो झाड़फूंक वाले बाबा के पास जाइये। इस झाड़फूंक पर अब तो मुझे भी उम्मीद होने लगा है। कुछ दिनों से पेट दर्द से परेशान हूं। सुना है बनारस में भी एक बाबा झाड़फूंक से रोगों का इलाज करते हैं। डाक्टर के यहां चक्कर काटने से अच्छा है झाड़फूंक ही करा लें। जांच और अल्ट्रासाउंड कराने की झंझट से मुक्ति भी मिलेगी। अगर ठीक हो जाऊंगा तो आपको भी सलाह दूंगा। फिलहाल इंतजार करना होगा।
अजय पांडेय
सुहवल, गाजीपुर

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