किससे कहें अपनी खुशी।
सबका यहां है मन दुखी।।
तुन्हें द्वार-द्वार ढूंढता रहा।
क्या पता तुम हो कहाँ।।
सबका यहां है मन दुखी।।
तुन्हें द्वार-द्वार ढूंढता रहा।
क्या पता तुम हो कहाँ।।
जिंदगी थी अंधकार की।
तकरार की इनकार की।।
क्या पता फिर ना मिले।
कर लो करार इकरार की।।
हर मौज है यहां कहकशी
किससे कहें अपनी खुशी...।।
तकरार की इनकार की।।
क्या पता फिर ना मिले।
कर लो करार इकरार की।।
हर मौज है यहां कहकशी
किससे कहें अपनी खुशी...।।
वह ज्ञान बांटता रहा।
यह ध्यान बांटता रहा।।
क्या पता कौन कहाँ रहे।
मैं प्यार बांटता रहा।।
यह खेल नहीं एक हंसी।
किससे कहें अपनी खुशी...।।
यह ध्यान बांटता रहा।।
क्या पता कौन कहाँ रहे।
मैं प्यार बांटता रहा।।
यह खेल नहीं एक हंसी।
किससे कहें अपनी खुशी...।।
गुजर रही थी तुम पर क्या।
यह सोचकर उदास था।।
क्या पता वह फिर मिले।
साथ-साथ चल पड़े।।
रुद्राक्ष था पर पर बहुमुखी।
किससे कहें अपनी खुशी...।।
यह सोचकर उदास था।।
क्या पता वह फिर मिले।
साथ-साथ चल पड़े।।
रुद्राक्ष था पर पर बहुमुखी।
किससे कहें अपनी खुशी...।।
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर
सुहवल, गाजीपुर
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