सचिन और प्रियंका को समर्पित
जिंदगी के रास्ते पर
आप दोनों साथ चलना
अनुभव की ईंट से
प्यार की रेत से
एक सुंदर इमारत बनाना
मैं भी कभी आऊंगा
मेहमान बनकर
खुशी होगी समर्पण के
इमारत में कुछ पल गुजारकर
कभी भटकना तो
रास्ता पूछ लेना
मिल जाऊंगा कहीं
तुम दोनों के आसपास ही
विश्वास को न होने देना कम
यही तो जिंदगी है
इसे गांठ बांध लेना
यही जीने की कला है
और साधना भी।।
आप दोनों साथ चलना
अनुभव की ईंट से
प्यार की रेत से
एक सुंदर इमारत बनाना
मैं भी कभी आऊंगा
मेहमान बनकर
खुशी होगी समर्पण के
इमारत में कुछ पल गुजारकर
कभी भटकना तो
रास्ता पूछ लेना
मिल जाऊंगा कहीं
तुम दोनों के आसपास ही
विश्वास को न होने देना कम
यही तो जिंदगी है
इसे गांठ बांध लेना
यही जीने की कला है
और साधना भी।।
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