Monday, 11 September 2017

बताओ न कब आओगे?

बताओ न कब आओगे?
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ए सावन अभी तो तुम आये थे
पूरी तरह से मैं भींगा भी नहीं
की तुम चले गए
बताओ न फिर कब आओगे?
ए सावन तुम इतना बरसो कि
मन की कुंठा पानी में धूल जाय
इस बारिश में आकंठ राग बह जाय।
अभी तो 'मय' गया नही
की तुम चले गए
बताओ न फिर कब आओगे?
ए सावन तुम इतना बरसो कि
मन के मुरझाये फूलों को खिलने दो
सूखी हुई इन पत्तों को फैल जाने दो।
अभी तो हरियाली आयी नहीं
की तुम चले गए
बताओ न फिर कब आओगे?
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर।

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