Monday, 11 September 2017

मैं इस पार खड़ा हूं

मैं इस पार खड़ा हूं
तुम नदी के उस पार
दोनों ही दो छोर पर
बीच में जल की धाराएं
आखिर कैसे मिलें दोनों
मैं शरीर तो तुम आत्मा
क्या तुम इस मृत शरीर में
फिर से आ सकोगे
अगर हां तो मिल जाते हैं
नदी की लहरों में एक साथ
मिटा देते हैं मैं व तुम का अस्तित्व
फिर से बन जाते हैं हम
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर

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