मेरी हसरतें हर बार धोखा दे गईं मुझे
कहा था सात जन्मों का है साथ।
तब से उसके इंतजार में बैठा हूं।
अब तो आंखें भी धोखा देने लगी।।
सात जन्म अगर लंबा लगे तुम्हें
तो इस जन्म में ही निभा देते।
जफा के बदले वफा दे देते।
तुमने तो कसम भी तोड़ दी।
एक आशिक की भ्रम तोड़ दी।।
मेरी आंखें पथरा गई तो क्या।
सांसों से पहचान लूगा तुम्हें।
हाथों पर हाथ रख दो।
तब भी जान लूंगा तुम्हें।
अब भी नहीं आये तुम।
तो समझ लूंगा कि मोदी थे तुम।
और मैं बेचारी जनता।।
कहा था सात जन्मों का है साथ।
तब से उसके इंतजार में बैठा हूं।
अब तो आंखें भी धोखा देने लगी।।
सात जन्म अगर लंबा लगे तुम्हें
तो इस जन्म में ही निभा देते।
जफा के बदले वफा दे देते।
तुमने तो कसम भी तोड़ दी।
एक आशिक की भ्रम तोड़ दी।।
मेरी आंखें पथरा गई तो क्या।
सांसों से पहचान लूगा तुम्हें।
हाथों पर हाथ रख दो।
तब भी जान लूंगा तुम्हें।
अब भी नहीं आये तुम।
तो समझ लूंगा कि मोदी थे तुम।
और मैं बेचारी जनता।।
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर
सुहवल, गाजीपुर
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