सॉरी! मुझे मुआफ कर देना।
इरान के शहर सारी में
सारी रात बैठी थी
‘सारी’ रूखसाना।
सारी के इंतजार में
उसने कर दी
सारी हदें पार।
फिर वह आया
सारी की शापिंग कर
तो कंठ से निकला
सिर्फ सॉरी।
अब ‘सारी’ की आंखों में
आंसू थे अपमान के
उसने कहा, मैं जा रही हूं
सारी शहर को छोडकर
मुझे अकेला छोड़ दो
हाथ जोड़कर कह रही हूं
सॉरी! मुझे मुआफ कर देना।
सारी रात बैठी थी
‘सारी’ रूखसाना।
सारी के इंतजार में
उसने कर दी
सारी हदें पार।
फिर वह आया
सारी की शापिंग कर
तो कंठ से निकला
सिर्फ सॉरी।
अब ‘सारी’ की आंखों में
आंसू थे अपमान के
उसने कहा, मैं जा रही हूं
सारी शहर को छोडकर
मुझे अकेला छोड़ दो
हाथ जोड़कर कह रही हूं
सॉरी! मुझे मुआफ कर देना।
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर
सुहवल, गाजीपुर
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