Monday, 11 September 2017

सुकमा में शहीद होने वालों की आत्माएं

सुकमा में शहीद होने वालों की आत्माएं
न्याय के लिए भटक रहीं हैं
निंदा से नहीं चलेगा काम
कब तक मरता रहेगा गरीब मां का लाल
एक अपना भी लाल खोकर तो देखो
उस लाल के लिए आंसू बहाकर तो देखो
शव के इंतजार में सूख जाएंगे आंसू
जब लाल आयेगा तिरंगे में लिपटा हुआ
फट जाएगा तुम्हारा भी कलेजा
जब टूटेंगीं चुड़ियां तो तुम मौन रह पाओगे?
क्या इस लाल के लिए भी निंदा कर पाओगे।
अगर नहीं तो फिर क्यों ऐसा कर रहे हो
जवानों की मौत पर आंसू क्यों नहीं बहा रहे हो।
56 इंच का नहीं इंदिरा वाला ही कलेजा ला दो
पाक को उसके घर में घुसकर सबक सीखा दो
अगर लाल बहादुर ही बन गये तो भी मंजूर है
जो अपनी कुर्बानी देकर देश को बचा लिया
तुम तो देश के गद्दारों से ही नहीं निपट पा रहे
इसीलिए तो सुकमा जैसी घटनाओं को
नक्सली अंजाम दे पा रहे?
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर

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