मैं क्या हूँ...
****
झूठ की दीवार ही नहीं
झूठ का महल होता है।
सच तो महल के सामने
चाय बेचता मिल जाएगा।
महल के गेट पर पहरेदार
और भीतर पालतू कुत्ते
दिन रात ड्यूटी में मुस्तैद
सच अंदर जाने न पाए।
अगर इजाजत है तो
सिर्फ झूठ को
बेइमान है तो भी चलेगा
रोक है तो सिर्फ इमानदार को
सत्य कहना पिछडापन है।
वरना अपनी कुर्सी खो जाने
के डर से अफसर और मंत्री
कबूतर की आवाज में
कभी गुटर- गू नहीं करता।
एक झूठ है-दूसरा सच है
तो आखिर मैं क्या हूँ?
लो जान लो तुम भी
डंके की चोट पर बता देता हूँ।
मैं तो नियत का कुल्हड़ हूँ
चाय कोई पीये, टूटना मुझे ही है।
अजय पाण्डेय
सुहवल, गाजीपुर
No comments:
Post a Comment